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लोग मुझे अपने होंठों से लगाए हुए हैं,

  लोग मुझे अपने होंठों से लगाए हुए हैं , मेरी शोहरत किसी के            नाम की मोहताज नहीं Attitude Shayari, log mujhe apane honthon  se lagae hue hain,  meree shoharat kisee ke  naam kee mohataaj nahin

Dil se teree yaad ko juda to nahin kiya, SORRY Shayari

निदा फ़ाज़ली ( Nida Fazli) एक प्रमुख भारतीय उर्दू और हिंदी कवि थे। उनका जन्म 12 अक्टूबर 1938 को दिल्ली , भारत में हुआ था और उनकी मृत्यु 8 फरवरी 2016 को मुंबई , महाराष्ट्र , भारत में हुई। वे एक प्रमुख शायर और गीतकार भी थे।  निदा फ़ाज़ली की कविताएँ और गीत उनकी भावनाओं और अनुभवों को व्यक्त करने के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने अपने काव्य में प्यार , जीवन , समाजिक मुद्दे , और धार्मिकता जैसे विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। उनकी कविताएँ और गीत भारतीय साहित्य और संगीत के मैदान में महत्वपूर्ण योगदान के रूप में मान्य जाते हैं। दिल से तेरी याद को जुदा तो नहीं किया,                रखा जो तुझे याद कुछ बुरा तो नहीं किया,      हम से तू नाराज़ हैं किस लिये बता जरा,            हमने कभी तुझे खफा तो नहीं किया.... । SORRY -  Shayari dil se teree yaad ko juda to nahin kiya,                rakha jo tujhe yaad kuchh bura to nahin kiya,      ham se to...

खता हो गयी तो फिर सज़ा सुना दो

  शहाब जाफ़री एक बारिक़ उर्दू कवि और लेखक हैं। वे भारतीय साहित्य के क्षेत्र में मशहूर हैं और उन्होंने अपनी कविताओं और निबंधों के माध्यम से साहित्यिक जगत में अपनी पहचान बनाई है। उनका काव्य उर्दू भाषा में होता है और उन्होंने अपनी विचारधारा और विचारों को कविता के माध्यम से अभिव्यक्त किया है। कृपया अधिक विशेष जानकारी के लिए शहाब जाफ़री के कृतियों और साहित्यिक कार्य के बारे में संदर्भ खोजें या उनके साहित्यिक योगदान के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए उनके आधिकारिक जीवनी या लेखन को खोजें।   खता हो गयी तो फिर सज़ा सुना दो        दिल में इतना दर्द क्यूँ है वजह बता दो                 देर हो गयी याद करने में जरूर       लेकिन तुमको भुला देंगे        ये ख्याल मिटा दो....... sorry - shayari 

न तेरी शान कम होती

  जौन एलिया ( Jaun Elia) एक प्रमुख उर्दू शायर और कवि थे , जिन्होंने अपनी शायरी के लिए मशहूरी प्राप्त की थी। उनका जन्म 14 दिसंबर 1931 को भारत के राजस्थान राज्य के अम्बाला शहर में हुआ था , और उनका निधन 8 नवंबर 2002 को हुआ था। जौन एलिया की शायरी उनकी अद्वितीय शैली , उदास और अंधकारमय विचारधारा , और उच्च भाषा के लिए प्रसिद्ध है। वे अक्सर प्यार , दर्द , और जीवन के परिपेषणों पर अपनी शायरी में भावनाओं को व्यक्त करते थे। जौन एलिया के काव्य साहित्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उन्होंने उर्दू भाषा में अपनी माहिरी के लिए सराहनीय प्रशंसा प्राप्त की है। उनकी कविताओं के कई संग्रह उपलब्ध हैं , और उनका काव्य उर्दू साहित्य के अद्वितीय अंश के रूप में मान्य जाता है। जौन एलिया का काव्य आज भी उर्दू शायरी के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में मान्य जाता है और उनकी कविताएँ उर्दू भाषा के प्रशंसकों के बीच लोकप्रिय हैं। न तेरी शान कम होती                            न रुतबा ही घटा होता     जो गुस्से में कहा तुमने वही  ...